जयपुर (हमारा वतन) शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस महापर्व के हर दिन माता दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा होती है। आज नवरात्रि का सातवां दिन यानी सप्तमी तिथि है, जो मां कालरात्रि की आराधना के लिए समर्पित है। मां कालरात्रि अपने भयानक स्वरूप के बावजूद भक्तों को भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति दिलाती हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि सातवें दिन की पूजा से सभी प्रकार के संकटों का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह होता है। लोग व्रत रखते हैं, विशेष भोग लगाते हैं, मंत्र और आरती करते हैं और शुभ मुहूर्त में मां की आराधना करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
आइए जानते हैं अंतर्राष्ट्रीय भविष्यवक्ता पंडित रविन्द्राचार्य से नवरात्रि के सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि कि पूजा विधि, व्रत कथा, मंत्र व आरती-
मां कालरात्रि का स्वरूप और महत्व – मां कालरात्रि का शरीर काला, बाल बिखरे हुए और गले में बिजली जैसी माला रहती है। इनके चार हाथ हैं जिनमें खड्ग, लौह शस्त्र, वरमुद्रा और अभयमुद्रा रहती है। यह स्वरूप भय और अंधकार का नाश करने वाला माना जाता है। इनकी पूजा से शत्रु भय, रोग और अकाल मृत्यु के डर से मुक्ति मिलती है।
पूजा विधि – सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान को साफ करें और मां कालरात्रि की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। गंगाजल से शुद्धिकरण करें। सिंदूर, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, फूल और नारियल अर्पित करें। धूप-दीप जलाएं और सिद्धकुंजिका स्तोत्र या अर्गला स्तोत्र का पाठ करें। मध्यरात्रि उपासना को सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
भोग – मां कालरात्रि को गुड़, ज्वार, नारंगी रंग का हलवा और पंचमेवा चढ़ाना शुभ माना जाता है। इस दिन नारंगी रंग के वस्त्र पहनना भी मंगलकारी होता है।
मंत्र
“ॐ देवी कालरात्र्यै नमः”
या
“एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।।’’
इस मंत्र के जाप से भय और विघ्नों का नाश होता है।
सातवें दिन की पूजा के लाभ – हर प्रकार के भय, बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति, स्वास्थ्य, धन और प्रतिष्ठा में वृद्धि, शत्रुओं पर विजय ,मानसिक बल और आत्मविश्वास बढ़ना