पंजाब (हमारा वतन) पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पालतू कुत्ते को भगवान कृष्ण की तरह सजाकर वॉट्सऐप स्टेटस लगाने पर महिला के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी है। कोर्ट ने इसे अपराध नहीं बल्कि सच्ची भक्ति और प्यार का रूप बताया है।
कुत्ते को भगवान कृष्ण की ड्रेस पहनाना गुनाह नहीं, HC बोला- यह तो भक्ति योग है :-
अपने पालतू कुत्ते को जन्माष्टमी के मौके पर भगवान कृष्ण की तरह सजाना और उसकी तस्वीर वॉट्सऐप स्टेटस पर लगाना कोई अपराध नहीं है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में यह टिप्पणी करते हुए एक महिला के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कृत्य प्यार और भक्ति की भावना से किया गया था, न कि किसी धर्म का अपमान करने के इरादे से। जस्टिस सुभाष मेहला की बेंच ने 1 जुलाई को दिए अपने आदेश में माना कि महिला के इस कदम में कोई आपराधिक मंशा नहीं थी।
‘कुत्ते को अपने बच्चे की तरह मानती है महिला’ :-
बार एंड बेंच की रिपोर्ट मुताबिक, अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर गौर किया कि आरोपी महिला शादी के 6 साल बाद भी निसंतान है और वह अपने पालतू कुत्ते को बिल्कुल अपने बच्चे की तरह प्यार करती है। कोर्ट ने कहा कि कुत्ते को कान्हा की पोशाक पहनाना या उसकी फोटो वॉट्सऐप पर शेयर करना किसी पवित्र वस्तु का अपमान नहीं है। यह दुर्भावना से नहीं, बल्कि गहरे स्नेह से उठाया गया कदम था।
‘सहिष्णुता जरूरी है, अति-संवेदनशीलता नहीं’ :-
जस्टिस मेहला ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा, “याचिकाकर्ता की व्यक्तिगत अभिव्यक्ति को सिर्फ इसलिए अपराध के दायरे में नहीं लाया जा सकता क्योंकि यह दूसरों की संवेदनशीलता के अनुरूप नहीं है। बिना किसी आपराधिक इरादे के कानूनी कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती। संवैधानिक सहिष्णुता को उस अति-संवेदनशीलता पर हावी होना चाहिए जो निर्दोष कामों को भी धर्म के अपमान के रूप में देखती है।”
अदालत की अन्य अहम टिप्पणियां :-
अदालत ने कहा कि जन्माष्टमी पर महिला का ध्यान कृष्ण पर केंद्रित था। अपने कुत्ते को बच्चे की तरह प्यार करते हुए उसे सजाना ‘भक्ति योग’ का हिस्सा है। कृष्ण के लिए कपड़े या प्रजाति से ज्यादा भक्त की भावनाओं की पवित्रता मायने रखती है।
कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 298 का विश्लेषण करते हुए कहा कि कुत्ते को पहनाए गए पीले कपड़े, मुकुट और गहने कानून के दायरे में ‘पवित्र वस्तु’ नहीं हैं। यह धारा तभी लागू होती है जब आपराधिक मंशा से किसी पवित्र वस्तु को नुकसान पहुंचाया जाए।
फैसले में भगवद गीता, महाभारत और हिंदू पौराणिक कथाओं का विस्तार से जिक्र किया गया। कोर्ट ने कहा कि भारतीय संस्कृति में जानवरों पर मानवीय गुणों या देवताओं का स्वरूप आरोपित करना (मानवीकरण) नई बात नहीं है। भगवान हनुमान, भगवान गणेश, गरुड़ और नंदी जैसे देवता अत्यंत लोकप्रिय हैं, जिनका स्वरूप पशु जगत से ही जुड़ा है।
अदालत ने कहा कि किसी की भावना आहत होने का सवाल मुख्य रूप से उस संकीर्ण (Myopic) नजरिए से पैदा होता है, जो ‘कुत्ते’ को भगवान की अशुद्ध रचना मानता है। महिला ने जो किया वह अच्छे विश्वास और बिना किसी द्वेष के किया गया था।
क्या था पूरा मामला :-
रंजनी गौड़ नाम की महिला के खिलाफ एक शिवसेना युवा नेता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि जन्माष्टमी पर कुत्ते को भगवान कृष्ण के रूप में दिखाने वाले वॉट्सऐप स्टेटस से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
जांच के दौरान महिला ने तस्वीर पोस्ट करने की बात स्वीकार की थी, लेकिन उसका कहना था कि उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि इससे कोई आहत हो सकता है। उसने सिर्फ एक त्योहार मनाया और अपने पालतू जानवर को वैसे ही सजाया, जैसे वह अपने बच्चे को सजाती।
हाईकोर्ट ने इस मामले में अभियोजन को कानूनी प्रक्रिया का साफ दुरुपयोग मानते हुए याचिकाकर्ता रंजनी गौड़ के खिलाफ दर्ज एफआईआर, चार्जशीट और सभी आगामी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वकील मितुल सिंह राणा और पंजाब सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल सुभाष गोदारा पेश हुए थे।
रिपोर्ट : राम गोपाल सैनी
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