जयपुर (हमारा वतन) गांधी दर्शन, एम के गांधी के विचारो पर आधरित है. जिसके मूल में सत्य, अहिंसा और सत्य ग्रह. नैतिक सिद्धान्त गांधी के सार्वेदया अर्थात सभी का विकास का उदस हो। जिस का उददेश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना था जहाँ न्याय, समानता और मानवता सर्वोपरि हो। देश का युवा दृष्ठि कोण बदलने में अपने अधिकारो और कर्तव्यो के प्रति जागरूक हो।
गांधी जी चिन्तन भारतीय चिन्तन धारा एवं दार्शनिकता का तत्कालीन परिस्थितियो में गांधी जी द्वारा किया गया सम्पूर्ण विश्व स्वीकार करता है। भारतीय चिन्तन परम्परा का गहरा प्रभाव राज नैतिक आर्थीक और सामजिक दृष्टि से गांधी जी का जीवन सत्य के साथ निरन्तर प्रयोग, समस्त प्रकार कि हिंसा का विरोध करता है।
एक व्यक्ति के रूप नहीं सुशकत विचार घरा एवं संस्था के रूप गांधी दर्शन मनुष्य का अन्तः चेतना को जाग्रत कर सृजनात्क मार्ग पर अग्रसर करता है अनुशान एवं समय के प्रबल पक्ष धर थी गांधी जी भारतीय संस्कृति नैतिक, मूल्यो चिन्तन परम्परा दर्शन में दर्शाया गया है। अहिंसा एव सत्य आदि का व्यवहारिक जीवन में सार्वजनिक रूप अहिंसा परमो धर्मः कहा गया है।
दो प्रमुख सिद्धान्त सत्य अहिंसा जो परम सत्य है और सत्य ही ईश्वर है। अहिंसा अस्तित्व की सबसे शक्ति शाली, राकित है। अहिंसा एवं प्रेम को मानव जाति का सर्रोच्च नियम माना जाता है। सत्य और अहिंसा के आर्दश जो सम्पूर्ण दर्शन का अधार है। समस्त मानव जाति के लिए प्रासंगिक है। भारत के कई विश्वविधालय एवं संस्थान गांधी दर्शन पर शोध कराया जाता है गांधी अनुसाधन शोध प्रमुख केन्द्र महाराष्ट्र एवं अरूणा प्रदेश में गांधी दर्शन पर शोध (Research) कराया जाता है।
डॉ. अशोक पाल सिंह शिक्षक/ पर्यावराण रा. उ.मा. वि. बिझौली हरिद्वार उत्तराखण्ड
रिपोर्ट – राम गोपाल सैनी
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